अब उनकी आँखों में बेहिसाब उदासी थी,
कहानी थोडी अधूरी थोडी बाकि थी,
कहानी थोडी अधूरी थोडी बाकि थी,
हम तो साथ थे उनके हर पल,
फिर भी जाने क्यूँ उनकी रूह अकेली थी,
यूँ तोह वफायें मुझसे और बेवफाई उनसे हो गई,
उनकी वफ़ा मेरी बेवफाई लेकिन अभी आधी थी,
इतनी लम्बी ज़िन्दगी क्यूँ दी मुझे,
उसके साथ जितना जिए उतनी ही उम्र काफी थी,
उसने तो छोड़ दिया बीच राह में,
मौत भी साथ ले जाने को कहाँ राजी थी,
एक हिस्से को किसी ने काट दिया उसके,
जो डोर उसके दिल से अपने दिल तक बंधी थी,
जिस्म तो ख़ाक हो गया लकडियों के ढेर में,
भटकती रही रूह जो तेरे प्यार की प्यासी थी,
मेरी रातों की तन्हाईयाँ भी चुराए के ले गया कोई,
जो मेरी वीरानो की अकेली साथी थी,
एक अजनबी के प्यार में उससे भी रिश्ता टूट गया,
मुझे मिलने जो चांदनी अक्सर ज़मीन पे उतर आती थी!
मुझे मिलने जो चांदनी अक्सर ज़मीन पे उतर आती थी!
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at 9:15 PM
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