क्या फ़ायदा किसी को चाहने का,
क्या फ़ायदा किसी की यादों में आंसू बहाने का …
जो समझे न किसी के दिल में बसे प्यार को,
क्या फ़ायदा उसके प्यार के लिए दिल को तड़पाने का …
छोटे से दिल को मिलते ग़म बहुत है ,
जिंदगी में मिलते हर पल ज़ख्म बहुत है …
मार ही डालती कब की यह दुनिया,
कमबख्त कुछ दोस्तों की दुआओं में दम बहुत है …
उसने जो मेरा साथ न दिया,
शायद उसकी भी कोई मजबूरी थी…
बेवफा तो वो हो नहीं सकती,
शायद मेरे मोहब्बत ही अधूरी थी
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at 9:52 AM
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