बेवफा तो वो हो नहीं सकती, शायद मेरे मोहब्बत ही अधूरी थी

Posted by रवि प्रकाश

क्या फ़ायदा किसी को चाहने का,
क्या फ़ायदा किसी की यादों में आंसू बहाने का …

जो समझे न किसी के दिल में बसे प्यार को,
क्या फ़ायदा उसके प्यार के लिए दिल को तड़पाने का …

छोटे से दिल को मिलते ग़म बहुत है ,
जिंदगी में मिलते हर पल ज़ख्म बहुत है …

मार ही डालती कब की यह दुनिया,
कमबख्त कुछ दोस्तों की दुआओं में दम बहुत है …

उसने जो मेरा साथ न दिया,
शायद उसकी भी कोई मजबूरी थी…

बेवफा तो वो हो नहीं सकती,
शायद मेरे मोहब्बत ही अधूरी थी

This entry was posted at 9:52 AM . You can follow any responses to this entry through the .

0 comments