इस टूटे हुए दिल के लिए अब दुआ कैसे करूँ
दर्द जब तूने दिया है तो गिला कैसे करूँ
अक्सर चलता रहा तनहा सफ़र में येही सोचा के मै
ये मुक़म्मल था सफ़र जो मैंने किया
अब तेरे बिना बाकि सफ़र कैसे करूँ
उम्र भर की मोह्बात का क्या सिला दिया है तुने
तू ही बता दे तेरे एन जफ़ाओं का गिला कैसे करूँ
थी कोई मेरे ही हाथों की लकीरों में कुछ कमी
अपनी तकदीर का अब तुझसे गिला कैसे करूँ
मेरी हर साँस में बसा है तू ज़न्दगी बन के ऐ दोस्त
तुझे भुला के मै बेवफाई कैसे करूँ ..
ये मुनासीब नही भुला दूँ उसे ..
तू बता इस जिस्म से ये जान जुदा कैसे करूँ
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at 8:24 PM
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