एक अजब सी पहेली हैं जिन्दगी,
सबके साथ होते हुए भी अकेली हैं जिन्दगी!
कभी तो एक प्यारा सा अरमान हैं जिन्दगी,
तो कभी दर्द से भरा तूफ़ान हैं जिन्दगी !
कभी फुलो जैसी मासूम हो जाती हैं जिन्दगी,
तो कभी गुनाहों का बोझ बन जाती हैं जिन्दगी !
कभी तो गुलो से भरा गुलिस्ता हैं जिन्दगी,
तो कभी काँटों से भरा रास्ता हैं जिन्दगी !
कोई तो बता दे क्या हैं जिन्दगी,
सुना हैं चाँद रोज की मेहमान हैं जिदंगी !
जिन्दगी को छोड़ एक दिन जाना पड़ेगा,
मौत को उस पल गले लगाना पड़ेगा!
जिन्दगी से चाहे जितना प्यार कर लो,
होती हैं आखिर बेवफा ये जिन्दगी!
ऐ बन्दे की कुछ ऐसे जी जाए जिन्दगी,
की बन जाए एक एहसास एक इतिहास जिन्दगी
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at 9:52 AM
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