जिन्दगी से चाहे जितना प्यार कर लो,

Posted by रवि प्रकाश

एक अजब सी पहेली हैं जिन्दगी,
सबके साथ होते हुए भी अकेली हैं जिन्दगी!
कभी तो एक प्यारा सा अरमान हैं जिन्दगी,
तो कभी दर्द से भरा तूफ़ान हैं जिन्दगी !

कभी फुलो जैसी मासूम हो जाती हैं जिन्दगी,
तो कभी गुनाहों का बोझ बन जाती हैं जिन्दगी !
कभी तो गुलो से भरा गुलिस्ता हैं जिन्दगी,
तो कभी काँटों से भरा रास्ता हैं जिन्दगी !

कोई तो बता दे क्या हैं जिन्दगी,
सुना हैं चाँद रोज की मेहमान हैं जिदंगी !
जिन्दगी को छोड़ एक दिन जाना पड़ेगा,
मौत को उस पल गले लगाना पड़ेगा!


जिन्दगी से चाहे जितना प्यार कर लो,
होती हैं आखिर बेवफा ये जिन्दगी!
ऐ बन्दे की कुछ ऐसे जी जाए जिन्दगी,
की बन जाए एक एहसास एक इतिहास जिन्दगी

This entry was posted at 9:52 AM . You can follow any responses to this entry through the .

0 comments